ज़रा चख के देखो /Zara Chakh Ka Dekho

Zara Chakh Ke Dekh

ज़रा चख के देखो कविता

ज़रा चख के देखो: जीवन का स्वाद

ज़रा चख के देखो,
जीवन का रस, सुख और दुःख का अनुभव।
मधुरता में छिपा है संदेश,
कटुता में भी है अद्भुत सन्दर्भ।

हर कड़वाहट में है मिठास का अंश

खट्टा, मीठा, तीखा—सब स्वादों का मेल,
यह जीवन का है खेल।
जो कड़वा है, वो सिखाता है,
जो मीठा है, वो लुभाता है।

सपनों का स्वाद भी अनोखा है

सपनों के भी रंग अनेक,
कभी खट्टे, कभी मीठे।
ज़रा चख के देखो इन सपनों को,
हर स्वाद में छुपा है रहस्य।

संवेदनाओं का अद्भुत संगम

जीवन के रंगों को महसूस करो,
हर अनुभव का स्वागत करो।
ज़रा चख के देखो उस पल को,
जहां छुपा है अनमोल सीख।

निष्कर्ष

ज़रा चख के देखो, जीवन के हर पहलू को।
हर स्वाद के पीछे छिपा है गहरा अर्थ।
कविता हमें प्रेरित करती है,
हर अनुभव को दिल से अपनाने के लिए।