तेनाली रामा की कहानियां: शिल्पी की अद्‌भुत मांग |Tenaliram Story Shilpi Ki Maang in Hindi

तेनालीराम की कहानी: शिल्पी की मांग

एक समय की बात है, विजयनगर साम्राज्य में राजा कृष्णदेव राय का शासन था। राजा अपनी प्रजा की भलाई के लिए जाने जाते थे। तेनालीराम, उनके दरबार के मुख्य विदूषक और बुद्धिमान सलाहकार, अपनी चतुराई और हाजिरजवाबी के लिए प्रसिद्ध थे।

एक दिन एक शिल्पकार दरबार में आया और राजा से निवेदन किया, “महाराज, मैं अपनी कला के लिए प्रसिद्ध हूँ और मैं आपके लिए एक अनोखी मूर्ति बनाना चाहता हूँ। लेकिन मुझे इसके लिए एक बड़ी धनराशि की आवश्यकता होगी।”राजा ने उसकी बात सुनी और सहमति जताई। उन्होंने शिल्पकार को धनराशि दी और एक महीने का समय दिया।

महीना बीतने के बाद, शिल्पकार ने मूर्ति लेकर दरबार में हाजिर हुआ। वह मूर्ति देखने में बहुत सुंदर थी। राजा और दरबारी उसकी कला से बहुत प्रभावित हुए।लेकिन तेनालीराम ने मूर्ति को ध्यान से देखा और कहा, “महाराज, यह मूर्ति अद्भुत है, लेकिन मुझे इसमें कुछ गड़बड़ी नजर आ रही है।

मुझे इसे जांचने का मौका दीजिए।”राजा ने अनुमति दी। तेनालीराम ने मूर्ति को हिला-डुला कर देखा और पाया कि मूर्ति के अंदर खोखला स्थान है, जिसमें सोना छुपा हुआ था। शिल्पकार ने मूर्ति बनाने के बहाने राजा के दिए धन से खुद के लिए सोना इकट्ठा किया था।

तेनालीराम ने यह रहस्य उजागर किया, जिससे राजा को शिल्पकार की धोखाधड़ी का पता चला। राजा ने शिल्पकार को दंडित किया और तेनालीराम की बुद्धिमत्ता की प्रशंसा की।

इस घटना से सभी को यह सबक मिला कि सच्चाई और ईमानदारी का मार्ग ही सबसे अच्छा है।