मूर्ख राजा और चतुर मंत्री
प्राचीन समय की बात है। एक राज्य में एक राजा शासन करता था, जो अत्यंत मूर्ख था। वह बिना सोचे-समझे निर्णय लेता था और अपने राज्य की भलाई के बारे में ज्यादा नहीं सोचता था।
लेकिन उसके दरबार में एक अत्यंत चतुर और बुद्धिमान मंत्री था, जो अपनी बुद्धिमत्ता से राजा की गलतियों को सुधारने का प्रयास करता रहता था।राजा का अजीब फरमानएक दिन राजा ने दरबार में घोषणा की – “हमारे राज्य के सभी वृद्ध लोग व्यर्थ हैं। वे किसी काम के नहीं, इसलिए उन्हें जंगल में छोड़ आना चाहिए।”
राजा का यह निर्णय सुनकर सभी दरबारी और प्रजा डर गए, लेकिन राजा के आदेश के खिलाफ कोई कुछ नहीं बोल सकता था। सभी ने अपने-अपने बुजुर्गों को जंगल में छोड़ना शुरू कर दिया।लेकिन चतुर मंत्री अपने वृद्ध पिता को बहुत प्रेम करता था।
उसने अपने पिता को जंगल में छोड़ने के बजाय एक गुप्त तहखाने में छिपा दिया और उनकी सेवा करने लगा।
राज्य पर संकट
कुछ महीनों बाद एक पड़ोसी राज्य के राजा ने एक कठिन चुनौती रखी। उसने संदेश भिजवाया – “अगर तुम्हारा राजा वास्तव में बुद्धिमान है, तो इन तीन प्रश्नों का उत्तर दे।
अगर उत्तर नहीं मिला, तो तुम्हारा राज्य हमारा हो जाएगा।”राजा बहुत चिंतित हो गया। उसने अपने दरबारियों और मंत्रियों से उत्तर पूछे, लेकिन कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाया। तब चतुर मंत्री ने राजा से एक दिन का समय मांगा और घर जाकर अपने वृद्ध पिता से सलाह ली।
उसके पिता ने बड़ी सरलता से सभी प्रश्नों के उत्तर दे दिए। अगले दिन मंत्री ने दरबार में उन उत्तरों को राजा के सामने रखा। राजा ने पड़ोसी राज्य को उत्तर भेजा, जिसे सुनकर वह राजा बहुत प्रभावित हुआ और युद्ध का विचार त्याग दिया।
राजा की समझदारी
राजा बहुत प्रसन्न हुआ और मंत्री से पूछा, “तुम्हें इतने कठिन प्रश्नों के उत्तर कहां से मिले?”मंत्री ने डरते-डरते सच बताया कि उसने अपने वृद्ध पिता को जंगल में छोड़ने के बजाय छिपाकर रखा था और उन्हीं की बुद्धिमत्ता से राज्य बचा।यह सुनकर राजा को अपनी भूल का एहसास हुआ। उसने तुरंत अपने पुराने आदेश को वापस ले लिया और सभी वृद्ध लोगों का सम्मान करने का निर्णय लिया।
शिक्षा
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बुजुर्गों के अनुभव और बुद्धिमत्ता अनमोल होती है। उनका सम्मान करना और उनकी सलाह लेना हमेशा हमारे लिए लाभदायक होता है।