भूत की कहानी: अंधेरे का भूत
बहुत समय पहले, एक गांव के किनारे एक घना जंगल था, जिसे लोग “अंधेरे का जंगल” कहते थे। वहां इतनी घनी पेड़-पत्तियां थीं कि दिन के समय भी सूरज की रोशनी मुश्किल से पहुंचती थी। गांव के लोग उस जंगल में जाने से डरते थे, क्योंकि कहते थे कि वहां “अंधेरे का भूत” रहता है।
अंधेरे का डर
गांव के बड़े-बुजुर्गों की कहानियों के अनुसार, जो भी उस जंगल में गया, वह कभी लौटकर नहीं आया। रात में जंगल से अजीब-सी चीखें और हंसने की आवाजें आती थीं। कुछ लोग दावा करते थे कि उन्होंने वहां एक विशाल परछाई को घूमते हुए देखा है।
नायक की जिज्ञासा
एक दिन, अर्जुन नाम का एक नौजवान, जो बहुत साहसी था, इस बात को झूठ समझकर जंगल के रहस्य को जानने की ठान लेता है। गांववालों ने उसे मना किया, लेकिन अर्जुन ने कहा, “मैं डरने वालों में से नहीं हूं। अगर अंधेरे का भूत सच में है, तो मैं उसे देखकर ही मानूंगा।”
जंगल का सफर
रात के समय अर्जुन एक मशाल और एक चाकू लेकर जंगल की ओर निकल पड़ा। जैसे ही वह जंगल के अंदर गया, उसे ठंड लगने लगी और चारों ओर सन्नाटा छा गया। उसे ऐसा महसूस हुआ, जैसे कोई उसे देख रहा हो।
अचानक, एक गहरी हंसी गूंजी और अर्जुन ने देखा कि एक विशाल परछाई उसके सामने खड़ी थी।
अंधेरे का भूत
परछाई ने गहरी आवाज में कहा, “तुमने यहां आने की हिम्मत कैसे की? यह जगह मेरी है!”
अर्जुन ने डर को दबाकर पूछा, “तुम कौन हो और यहां क्यों रहते हो?”
भूत ने बताया, “मैं एक राजा था, जिसे धोखे से मारा गया। मेरी आत्मा को इस जंगल में कैद कर दिया गया। जो भी यहां आता है, मैं उसे अपनी कैद में ले लेता हूं।”
अर्जुन की चालाकी
अर्जुन ने सोचा कि भूत को शांत करना होगा। उसने कहा, “अगर तुम्हारी आत्मा को मुक्त करना है, तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं।”
भूत ने अर्जुन को एक मंत्र बताया और कहा कि इसे पूरे विश्वास के साथ पढ़ना होगा। अर्जुन ने मंत्र पढ़ा, और अचानक जंगल में तेज रोशनी छा गई। भूत ने धीरे-धीरे अपनी शक्ति खो दी और उसकी आत्मा मुक्त हो गई।
गांव की शांति
अर्जुन सुबह तक गांव लौट आया और सबको यह कहानी सुनाई। उसके साहस और बुद्धिमानी के कारण जंगल से अंधेरे का भूत हमेशा के लिए चला गया। अब गांव के लोग बिना डर के जंगल में जा सकते थे।
सीख
इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि डर को समझदारी और साहस से हराया जा सकता है।
“डर में भी हिम्मत रखो, क्योंकि हर डर के पीछे एक हल होता है।”