तेनाली रामा की कहानियां: अपमान का बदला | Apmaan ka badla Tenali Raman Story in Hindi

अपमान का बदला – तेनाली रामन की कहानी

एक बार विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में तेनाली रामन के बारे में किसी दरबारी ने झूठी बात कह दी। उसने कहा, “तेनाली रामन अपनी बुद्धिमानी का घमंड करता है और दूसरों को नीचा दिखाने का प्रयास करता है।”यह सुनकर राजा को भी थोड़ा गुस्सा आया और उन्होंने तेनाली रामन को सबक सिखाने का सोचा।

राजा ने तेनाली को दरबार में बुलाया और कहा, “तेनाली, क्या तुम इतने बुद्धिमान हो कि किसी का भी अपमान कर सकते हो और फिर बिना गुस्सा किए उनसे माफी मंगवा सकते हो?”तेनाली रामन ने मुस्कुराते हुए कहा, “महाराज, मैं यह कर सकता हूं, लेकिन यह कार्य करने के लिए मुझे समय और मौका चाहिए।” राजा ने उन्हें अनुमति दे दी।

कुछ दिनों बाद, तेनाली रामन ने दरबार में आने वाले सभी दरबारियों को एक शानदार दावत का न्योता दिया। उन्होंने सभी को कहा कि वे साफ-सुथरे और अच्छे कपड़े पहनकर आएं। सभी दरबारी बड़े उत्साह के साथ दावत में पहुंचे।जब दरबारियों ने तेनाली रामन से पूछा कि भोजन कब परोसा जाएगा, तो तेनाली रामन ने उन्हें एक घड़े की ओर इशारा किया।

घड़ा मिट्टी से भरा हुआ था। तेनाली ने कहा, “पहले यह मिट्टी खत्म करो, तभी भोजन मिलेगा।”दरबारियों ने इसे अपमान समझा और गुस्से में बोले, “यह क्या मजाक है, तेनाली? हम मिट्टी खाने नहीं आए हैं!”इस पर तेनाली रामन मुस्कुराते हुए बोले, “मुझे माफ कीजिए, यह मेरी गलती थी। मेरा मकसद आपको अपमानित करना नहीं था। अगर मैंने आपके सम्मान को ठेस पहुंचाई हो, तो कृपया मुझे क्षमा करें।”दरबारियों ने देखा कि तेनाली कितनी विनम्रता से माफी मांग रहे हैं।

उनका गुस्सा ठंडा हो गया और उन्होंने तेनाली को माफ कर दिया।अगले दिन, राजा ने इस घटना के बारे में सुना और तेनाली रामन से पूछा, “तुमने यह सब क्यों किया?”तेनाली रामन ने कहा, “महाराज, मैंने यह साबित करने की कोशिश की कि अपमान का बदला लेने के लिए गुस्सा करने की जरूरत नहीं है। अगर आप माफी मांग लें, तो गुस्सा भी खत्म हो जाता है और रिश्ते भी बने रहते हैं।”राजा ने तेनाली रामन की बुद्धिमानी की प्रशंसा की और उन्हें इनाम दिया।

निष्कर्ष: समझदारी और विनम्रता से किसी भी समस्या का हल निकाला जा सकता है।