बेशकीमती फूलदान – तेनालीराम की कहानी
एक बार की बात है, विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय को एक विदेशी राजा ने एक सुंदर और बेशकीमती फूलदान तोहफे में दिया। फूलदान इतना सुंदर था कि उसे राजमहल के खास कक्ष में रखा गया। राजा ने अपने सभी दरबारियों को बुलाकर उस फूलदान को दिखाया और कहा, “यह फूलदान हमारे राज्य की शान है।
जो भी इसे नुकसान पहुँचाएगा, उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।”दरबारियों ने फूलदान की खूब प्रशंसा की और राजा की बात का समर्थन किया। लेकिन तेनालीराम ने चुपचाप खड़े रहकर सब कुछ सुना।कुछ दिनों बाद, तेनालीराम ने जानबूझकर दरबार के सामने वह फूलदान गिराकर तोड़ दिया।
यह देखकर सभी दरबारी चौंक गए। राजा गुस्से में लाल हो गए और बोले, “तेनालीराम, तुमने ऐसा क्यों किया? क्या तुम्हें सजा का डर नहीं है?”तेनालीराम ने नम्रता से जवाब दिया, “महाराज, मैं जानता हूँ कि यह फूलदान बेशकीमती था, लेकिन इसकी वजह से सब लोग तनाव में जी रहे थे। हर कोई इसे टूटने के डर से परेशान था। मैंने इसे तोड़कर सबको उस तनाव से मुक्त कर दिया।
अब हम सब सुकून से जी सकते हैं।”राजा ने तेनालीराम की बात पर गहराई से विचार किया और उनकी बुद्धिमानी की सराहना की। उन्होंने कहा, “तेनाली, तुमने हमें एक महत्वपूर्ण सीख दी है। कभी-कभी चीजों का महत्व इतना नहीं होता जितना हम उन्हें दे देते हैं।”इस तरह तेनालीराम ने अपनी चतुराई और समझदारी से एक बार फिर सबको प्रभावित किया।
सीख: हमें जीवन में चीजों के महत्व को सही तरीके से समझना चाहिए और बेवजह का तनाव नहीं लेना चाहिए।