विश्वासघात- राजा रानी की कहानी | Betrayal Story Of King And Queen In Hindi

राजा और रानी की विश्वासघात की कहानी

बहुत समय पहले, एक समृद्ध और शक्तिशाली राज्य पर राजा विक्रमसिंह का शासन था। उनकी रानी, रानी सौम्या, अपार सौंदर्य और बुद्धिमत्ता की प्रतीक थी। राजा अपनी रानी से अत्यधिक प्रेम करते थे और उन पर अटूट विश्वास रखते थे। लेकिन यह विश्वास ही उनके पतन का कारण बना।

राज्य में नई साजिश

राजा विक्रमसिंह के राज्य में एक शक्तिशाली सेनापति था, रणधीर, जो बचपन से ही राजा का मित्र था। लेकिन समय के साथ, उसके मन में राज्य को हथियाने की लालसा बढ़ने लगी। रणधीर जानता था कि राजा कभी भी उस पर शक नहीं करेंगे, लेकिन रानी सौम्या एक बड़ी बाधा थी।

रानी सौम्या को राज्य की राजनीति की गहरी समझ थी, और वह रणधीर की साजिशों को भांप चुकी थी। लेकिन रणधीर ने बड़ी चालाकी से रानी को अपने जाल में फंसा लिया। उसने रानी के सामने राजा की कमजोरियां और उनकी ग़लतियों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। धीरे-धीरे, रणधीर रानी के करीब आता गया और उसे राजा के विरुद्ध भड़काने लगा।

विश्वासघात की रात

एक रात, जब राजा विक्रमसिंह गहरी नींद में थे, रानी सौम्या ने महल का दरवाजा खोल दिया और रणधीर अपनी सेना के साथ अंदर घुस आया। राजा को जब तक कुछ समझ आता, तब तक उनके अपने सैनिक भी रणधीर के पक्ष में आ चुके थे।राजा विक्रमसिंह ने अपनी तलवार उठाई, लेकिन यह लड़ाई पहले ही हार चुके थे। रणधीर ने रानी की ओर देखा, जिसने बिना कुछ कहे सिर झुका लिया। राजा ने महसूस किया कि जिसे वे सबसे अधिक प्रेम करते थे, वही उनकी सबसे बड़ी शत्रु बन चुकी थी।

अंत और सीख

रणधीर ने राजा का वध कर दिया और स्वयं को नया शासक घोषित कर दिया। लेकिन कुछ ही समय में, रानी सौम्या को एहसास हुआ कि रणधीर ने केवल उसे इस्तेमाल किया था। वह अब उसे भी खत्म करने की योजना बना रहा था।एक रात, जब रणधीर नशे में था, रानी सौम्या ने अपनी भूल का प्रायश्चित करने के लिए उसे विष दे दिया। जैसे ही रणधीर ने अंतिम सांस ली, रानी ने स्वयं भी विष पी लिया।इस प्रकार, एक प्रेम, लालच और विश्वासघात की कहानी समाप्त हो गई।

सीख:

यह कहानी हमें सिखाती है कि विश्वासघात की जड़ें लालच और छल में होती हैं, और जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वह खुद भी उसी में गिर जाता है।