शेख चिल्ली की कहानियां बहुत ही रोचक और मनोरंजक होती हैं। यहाँ शेख चिल्ली की खिचड़ी से जुड़ी एक मजेदार कहानी प्रस्तुत है:—
शेख चिल्ली की खिचड़ीएक बार की बात है, शेख चिल्ली अपने गुरु के आश्रम में थे। सर्दी का मौसम था और सभी लोग खाने-पीने का इंतजाम कर रहे थे। शेख चिल्ली ने सोचा, “क्यों न मैं आज खिचड़ी बनाऊं और सबको खिलाऊं।”उन्होंने चावल और दाल लाकर खिचड़ी बनाने के लिए चूल्हा जलाया और हांडी में खिचड़ी डाल दी।
जब खिचड़ी पकने लगी, तो शेख चिल्ली ने सोचा, “अब खिचड़ी पकने में तो समय लगेगा, तब तक मैं थोड़ा आराम कर लेता हूं।”शेख चिल्ली आराम करने के लिए पेड़ के नीचे लेट गए। लेटे-लेटे उन्होंने सोचना शुरू कर दिया, “जब खिचड़ी बन जाएगी, तो सब मुझे तारीफ करेंगे। लोग कहेंगे, ‘शेख चिल्ली ने कितनी स्वादिष्ट खिचड़ी बनाई है।’
फिर राजा तक मेरी खिचड़ी की चर्चा पहुंचेगी। राजा मुझे अपने महल में बुलाएगा और मुझसे कहेगा, ‘शेख चिल्ली, तुम्हारी खिचड़ी बहुत मशहूर है। तुम मेरे राजमहल के रसोइये बन जाओ।’ फिर मैं राजा का खास बन जाऊंगा।”शेख चिल्ली की कल्पनाएँ यहीं नहीं रुकीं। वह सोचने लगे, “राजा मुझे ईनाम देगा, बहुत सारा धन-दौलत मिलेगा।
मैं एक बड़ा घर बनाऊंगा। फिर शादी करूंगा। मेरे बच्चे होंगे। और फिर…”शेख चिल्ली अपनी कल्पनाओं में इतना खो गए कि खिचड़ी का ध्यान ही नहीं रहा। इधर हांडी में खिचड़ी जल गई और उसकी खुशबू पूरे आश्रम में फैल गई।जब लोगों ने देखा कि खिचड़ी जल चुकी है, तो सभी शेख चिल्ली को बुलाने आए।
शेख चिल्ली को झिंझोड़ा और कहा, “शेख चिल्ली! तुम्हारी खिचड़ी तो जल गई!”शेख चिल्ली उठे और मुस्कुराते हुए बोले, “अरे! खिचड़ी जलेगी नहीं तो राजा मुझे कैसे बुलाएगा?”सभी लोग शेख चिल्ली की बात सुनकर हँसने लगे और बोले, “तुम्हारे सपने देखने की आदत वाकई कमाल की है!”—
नैतिक शिक्षा:शेख चिल्ली की यह कहानी हमें सिखाती है कि ख्वाब देखना अच्छी बात है, लेकिन अपने काम पर भी ध्यान देना जरूरी है, नहीं तो मेहनत बर्बाद हो सकती है।