दयालु राजा की कहानी | Merciful King Story In Hindi

दयालु राजा की कहानी

बहुत समय पहले, एक दूर देश में एक राजा राज करता था, जिसे लोग उसकी दयालुता और न्यायप्रियता के लिए जानते थे। उसका नाम राजा विक्रम था। वह हमेशा अपनी प्रजा की भलाई के बारे में सोचता और उनकी परेशानियों को हल करने का प्रयास करता।

एक अनोखा फैसला

एक दिन, राज्य में दो व्यापारी एक विवाद को लेकर राजा के दरबार में आए। दोनों का दावा था कि एक अनमोल हीरा उनका है। राजा ने ध्यान से दोनों की बातें सुनीं और फिर सोच में पड़ गया। वह चाहता था कि न्याय भी हो और कोई निर्दोष भी न सजा पाए।राजा ने कहा, “मैं इस हीरे को दो भागों में काट देता हूँ और तुम दोनों को बराबर हिस्से दे देता हूँ।”

यह सुनकर पहले व्यापारी ने खुशी से हामी भर दी, लेकिन दूसरा व्यापारी घबरा गया और बोला, “नहीं महाराज! कृपया इस हीरे को मत काटिए। यह मेरा नहीं है, इसे दूसरे व्यापारी को दे दीजिए।”

राजा मुस्कुराए और बोले, “यही असली मालिक है, क्योंकि जो सच्चा मालिक होता है, वह अपने धन से ज्यादा उसकी सलामती की चिंता करता है।” राजा ने हीरा सच्चे व्यापारी को दे दिया और झूठे व्यापारी को राज्य से निकाल दिया।

राजा की दयालुताराजा विक्रम ने अपने जीवन में कई ऐसे फैसले लिए, जिससे उनकी प्रजा उन्हें “दयालु राजा” कहने लगी। उन्होंने निर्धनों की मदद की, अनाथों को सहारा दिया और हमेशा सत्य व न्याय का साथ दिया।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि सच्चाई और दया हमेशा विजयी होती है।