मुल्ला नसरुद्दीन की कहानी: रोटी क्या है? / Mulla Nasruddin Story Roti kya Hai?

मुल्ला नसरुद्दीन की कहानी: “रोटी क्या है?”

एक बार की बात है, मुल्ला नसरुद्दीन एक गाँव के मेले में गए। वहाँ एक ठेले पर गरमा-गरम रोटियाँ बिक रही थीं।

मुल्ला ने सोचा, “चलो, आज कुछ नया खाया जाए।”उन्होंने ठेलेवाले से पूछा, “यह क्या है?”ठेलेवाले ने जवाब दिया, “यह रोटी है।”मुल्ला ने पूछा, “रोटी कैसी होती है?”ठेलेवाले ने कहा, “खाकर देखिए, आपको पता चल जाएगा।”मुल्ला ने एक रोटी खरीद ली और उसे खाने लगे।

लेकिन जैसे ही उन्होंने रोटी का पहला टुकड़ा खाया, उन्हें कुछ खास स्वाद महसूस नहीं हुआ।मुल्ला ने ठेलेवाले से कहा, “ये तो अजीब चीज़ है। ना मिठास है, ना खट्टापन। आखिर ये रोटी किस काम की है?”ठेलेवाले ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “मुल्ला जी, रोटी का स्वाद उसकी सादगी में है।

इसे आप दाल, सब्ज़ी, या चटनी के साथ खाएंगे तो असली मज़ा आएगा। यह अकेली भले साधारण लगे, पर यह बाकी चीज़ों का साथ देकर उन्हें बेहतर बना देती है।”मुल्ला ने सोचा और कहा, “अरे, रोटी तो इंसानों की तरह हुई।

अकेली बेशक साधारण लगे, लेकिन जब साथ हो, तो ज़िंदगी का मज़ा दोगुना हो जाता है।”ठेलेवाले ने हँसते हुए कहा, “सच कहा मुल्ला जी, रोटी और ज़िंदगी में यही समानता है।”और इस तरह मुल्ला नसरुद्दीन को रोटी के साथ-साथ ज़िंदगी का एक और पाठ मिल गया।