शेख़ चिल्ली की कहानी: खुरपी वाला किस्सा
शेख़ चिल्ली अपनी हंसी-मज़ाक और अनोखी हरकतों के लिए मशहूर थे। एक दिन की बात है, शेख़ चिल्ली अपने खेत में काम कर रहे थे। उनके पास एक खुरपी थी, जिससे वे खेत की मिट्टी खोद रहे थे। काम करते-करते उनका ध्यान कहीं और चला गया और वे अपने सपनों में खो गए।उन्होंने सोचा, “अगर मैं इस खेत में खूब मेहनत करूंगा, तो फसल अच्छी होगी। फसल को बेचकर बहुत पैसे मिलेंगे।
उन पैसों से मैं एक बड़ा मकान बनवाऊंगा। मकान के साथ एक बग़ीचा होगा। फिर मैं एक अच्छी सी सवारी खरीदूंगा और गाँव में सबको दिखाऊंगा। सभी लोग मेरी तारीफ करेंगे।”सपनों में खोए-खोए शेख़ चिल्ली ने खुरपी से मिट्टी खोदना बंद कर दिया और हवा में खुरपी चलाने लगे। तभी उनके एक दोस्त ने आकर देखा कि शेख़ चिल्ली जमीन पर नहीं, बल्कि हवा में खुरपी चला रहे हैं।दोस्त ने पूछा, “शेख़ चिल्ली, यह तुम क्या कर रहे हो?”शेख़ चिल्ली ने जवाब दिया, “मैं सपने देख रहा हूँ कि मैं अमीर बन गया हूँ।
और यह खुरपी मेरे सपनों को साकार करने का पहला कदम है।”दोस्त हँसते हुए बोला, “शेख़ चिल्ली, सपने देखना अच्छी बात है, लेकिन काम करना भी ज़रूरी है। अगर तुम इसी तरह हवा में खुरपी चलाते रहोगे, तो फसल कैसे उगेगी?”शेख़ चिल्ली को अपनी गलती का एहसास हुआ और वे हंसते हुए फिर से खेत में काम करने लगे।
शिक्षा: सपने देखना ज़रूरी है, लेकिन उन्हें सच करने के लिए मेहनत भी करनी पड़ती है।