यह कहानी शेख चिल्ली की है, जो अपनी मासूमियत और मजाकिया हरकतों के लिए मशहूर थे। एक बार शेख चिल्ली ने ट्रेन में सफर करने का सोचा। उन्होंने अपनी मां से पैसे मांगे और टिकट खरीदकर स्टेशन पर पहुंच गए।
ट्रेन का सफर
शेख चिल्ली पहली बार ट्रेन में सफर कर रहे थे, इसलिए बहुत उत्साहित थे। उन्होंने खिड़की के पास की सीट चुनी ताकि बाहर का नज़ारा देख सकें। ट्रेन चली तो शेख चिल्ली खिड़की से सिर बाहर निकालकर तेज़ आवाज़ में चिल्लाने लगे,”देखो! मैं ट्रेन में हूं, मैं ट्रेन में हूं!”पास बैठे यात्रियों ने उन्हें समझाया, “भाई, सिर बाहर मत निकालो, चोट लग जाएगी।” लेकिन शेख चिल्ली कहां मानने वाले थे। उन्होंने कहा, “मुझे तो सब देख रहे हैं कि मैं ट्रेन में हूं।”
भोजन का किस्सा
थोड़ी देर बाद ट्रेन एक स्टेशन पर रुकी। शेख चिल्ली ने चाय वाले से चाय खरीदी और बिस्कुट का पैकेट भी ले लिया। उन्होंने सोचा कि बिस्कुट खाकर चाय का स्वाद और बढ़ जाएगा। लेकिन जैसे ही बिस्कुट का पहला टुकड़ा चाय में डाला, वह गिर गया। शेख चिल्ली परेशान हो गए और बोले, “अरे! चाय ने मेरा बिस्कुट खा लिया।”यह सुनकर बाकी यात्री हंसने लगे और समझाया कि बिस्कुट घुल गया है। लेकिन शेख चिल्ली ने जिद पकड़ ली, “चाय से मेरा बिस्कुट वापस दो!”
उतरने का किस्सा
जब शेख चिल्ली का स्टेशन आने वाला था, उन्होंने सोचा कि जल्दी से उतरने के लिए ट्रेन के दरवाजे के पास खड़ा हो जाऊं। जैसे ही ट्रेन रुकी, शेख चिल्ली ने पहले अपना बैग बाहर फेंका और फिर खुद कूद गए। नीचे उतरते ही उन्होंने कहा, “देखो, मैं तो ट्रेन से पहले ही उतर गया!”यात्रियों ने हंसते हुए कहा, “शेख चिल्ली, तुमने तो सफर को मजेदार बना दिया।”
निष्कर्षशेख चिल्ली की मासूमियत और अजीब हरकतें हर किसी के चेहरे पर मुस्कान ला देती थीं। उनका यह ट्रेन का सफर भी सबके लिए यादगार बन गया।