तेनाली रामा की कहानियां: अपराधी बकरी | Tenali Raman Apradhi Bakri Story in Hindi

तेनालीरामन और अपराधी बकरी

एक बार की बात है, विजयनगर साम्राज्य में एक गरीब किसान रहता था। उसकी एक बकरी थी, जो उसकी रोजी-रोटी का साधन थी। एक दिन, एक चोर उसकी बकरी चुराने की योजना बना रहा था।चोर ने बकरी को पकड़ लिया और जंगल की ओर भागने लगा। किसान को जब यह बात पता चली, तो वह भागता हुआ राजा कृष्णदेव राय के दरबार में पहुंचा और न्याय की गुहार लगाई। राजा ने तेनालीरामन को यह मामला सौंप दिया।

तेनालीरामन ने चोर को पकड़ने की योजना बनाई। उन्होंने चोर का पीछा किया और उसे जंगल में पकड़ लिया। लेकिन उन्होंने चोर से बकरी तुरंत नहीं छीनी। इसके बजाय, उन्होंने चोर से कहा,”अगर तुम यह बकरी राजा के सामने लेकर जाओगे और साबित कर दोगे कि यह तुम्हारी है, तो राजा तुम्हें इनाम देंगे।”चोर खुश हो गया और तेनालीरामन की बात मानकर बकरी को राजा के दरबार में ले आया।

वहां तेनालीरामन ने राजा से कहा,”महाराज, इस चोर ने बकरी चुराई है। अगर आप इसे सच मानते हैं, तो इसे इनाम दीजिए।”तभी किसान ने अपनी बकरी को पहचान लिया और बोला, “यह मेरी बकरी है। मैं इसे बचपन से पाल रहा हूं।” किसान ने बकरी के कान पर बने विशेष निशान को दिखाया, जिससे साबित हो गया कि बकरी उसी की है।चोर को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने तुरंत अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

राजा ने चोर को सजा दी और किसान को उसकी बकरी लौटा दी।इस तरह, तेनालीरामन की चतुराई से न्याय हुआ और किसान को उसकी बकरी वापस मिल गई।शिक्षा:सच और बुद्धिमानी से हर समस्या का समाधान किया जा सकता है।