तेनाली रामन का न्याय
तेनाली रामन अपनी बुद्धिमानी और हाजिरजवाबी के लिए जाने जाते थे। उनके किस्से हमेशा प्रेरणादायक और मनोरंजक होते हैं। यह कहानी उनके न्यायप्रिय स्वभाव की है।एक बार विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में दो किसान झगड़ा लेकर आए।
एक किसान, रामू, ने शिकायत की कि दूसरे किसान, श्यामू, ने उसकी जमीन पर कब्जा कर लिया है। श्यामू ने अपनी सफाई में कहा कि जमीन उसकी है और रामू झूठ बोल रहा है।राजा ने दोनों पक्षों की बात सुनी, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिलने के कारण वे उलझन में पड़ गए।
उन्होंने तेनाली रामन को यह मामला सुलझाने की जिम्मेदारी दी।तेनाली रामन ने दोनों किसानों से कहा, “जमीन का मामला बड़ा गंभीर है। हम इसका सही फैसला करेंगे। कल सुबह तुम दोनों उस जमीन पर मिलो।”अगले दिन तेनाली रामन दोनों किसानों को लेकर उस विवादित जमीन पर पहुंचे।
उन्होंने कहा, “जिसकी यह जमीन है, वह इसे सबसे ज्यादा प्यार करता होगा। इसलिए हम देखेंगे कि जमीन किसे स्वीकार करती है। अब तुम दोनों इस जमीन को खोदो।”दोनों किसान खुदाई करने लगे। रामू ने पूरे जोश और मेहनत के साथ जमीन खोदी, जबकि श्यामू आलस्य से काम करता रहा।
तेनाली रामन ने यह देखकर राजा को बताया, “महाराज, जमीन रामू की है। उसने इसे अपने प्यार और मेहनत से खोदा, जबकि श्यामू ने इसे पाने में कोई रुचि नहीं दिखाई।”राजा ने तेनाली रामन के निर्णय को मान लिया और रामू को उसकी जमीन वापस दिला दी।
शिक्षा:इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चाई और न्याय के साथ मेहनत और ईमानदारी को हमेशा पहचान मिलती है।