तेनालीराम और लाल मोर की कहानी | Tenaliram Aur Lal Mor kahani In Hindi

तेनालीराम और लाल मोर की कहानीतेनालीराम अपनी बुद्धिमानी और चतुराई के लिए जाने जाते थे। उनकी कहानियाँ हमें हमेशा कुछ सीखने का अवसर देती हैं। यह कहानी “लाल मोर” की है, जो उनकी समझदारी का एक और बेहतरीन उदाहरण है।

कहानी:

एक दिन राजा कृष्णदेव राय ने दरबार में घोषणा की, “जो कोई मुझे लाल रंग का मोर लाकर देगा, उसे मैं इनाम दूंगा।” यह सुनकर सभी दरबारी चौंक गए। लाल रंग का मोर किसी ने न देखा था, न सुना था। सभी ने सोचा कि यह असंभव कार्य है।

लेकिन तेनालीराम हमेशा की तरह मुस्कुराए और बोले, “महाराज, मैं आपके लिए लाल मोर ला सकता हूँ।” राजा ने हैरानी से कहा, “अगर तुमने यह कर दिखाया, तो तुम्हें बड़ा इनाम मिलेगा।”तेनालीराम की चतुराई:तेनालीराम ने पास के बाजार में जाकर एक सफेद मोर खरीदा। फिर उसने मोर को हल्दी और सिंदूर के घोल से रंग दिया। कुछ ही समय में सफेद मोर पूरी तरह से लाल रंग का हो गया।तेनालीराम ने मोर को दरबार में प्रस्तुत किया।

राजा और सभी दरबारी हैरान रह गए। राजा ने पूछा, “क्या यह वास्तव में लाल मोर है?” तेनालीराम ने विनम्रता से कहा, “महाराज, यह लाल मोर उतना ही असली है, जितना लाल मोर के अस्तित्व की आपकी कल्पना।”राजा को तेनालीराम की चतुराई समझ में आ गई। उन्होंने उसे इनाम देकर उसकी बुद्धिमानी की प्रशंसा की।

नैतिक शिक्षा:

इस कहानी से हमें सिखने को मिलता है कि समस्या कितनी भी कठिन क्यों न हो, चतुराई और समझदारी से उसका हल निकाला जा सकता है।