तेनाली रामा की कहानियां: मनहूस कौन | Tenaliram Manhoos Kaun Story in Hindi

तेनालीराम: मनहूस कौन?

तेनालीराम अपनी बुद्धिमत्ता और हाजिरजवाबी के लिए मशहूर थे। एक दिन विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में एक व्यापारी शिकायत लेकर आया। उसने कहा, “महाराज, मेरे साथ एक अजीब घटना हुई। जब भी मैं इस व्यक्ति को देखता हूँ, मेरे काम बिगड़ जाते हैं। यह व्यक्ति मनहूस है।”व्यापारी ने एक व्यक्ति की ओर इशारा किया जो दरबार में मौजूद था।

वह व्यक्ति बेचारा भयभीत होकर राजा की ओर देख रहा था। राजा ने व्यापारी की बात सुनी और पूछा, “तुम्हें ऐसा क्यों लगता है?”व्यापारी ने जवाब दिया, “महाराज, जब भी मैंने इसे देखा, मेरे काम बिगड़े। पहली बार इसे देखकर मैं एक बड़ा सौदा करने गया, लेकिन वह सौदा रद्द हो गया। दूसरी बार इसे देखकर मेरी नाव डूब गई।”राजा ने उस व्यक्ति की ओर देखा और उससे पूछा, “क्या तुम इन घटनाओं के बारे में कुछ जानते हो?”वह व्यक्ति बोला, “महाराज, मेरा इन घटनाओं से कोई लेना-देना नहीं है। मैं तो सिर्फ अपने काम से जा रहा था।”

राजा ने तेनालीराम से इस मामले को हल करने के लिए कहा। तेनालीराम ने सोचा और मुस्कुराते हुए राजा से कहा, “महाराज, हमें यह पता लगाना होगा कि असली मनहूस कौन है।”अगले दिन, तेनालीराम ने व्यापारी और उस व्यक्ति को बुलाया और कहा, “हम एक परीक्षण करेंगे। व्यापारी, तुम सुबह सबसे पहले अपनी परछाई देखना। अगर तुम्हारा दिन अच्छा बीते तो यह व्यक्ति निर्दोष है।

लेकिन अगर तुम्हारे दिन में कुछ गलत हुआ, तो दोष तुम्हारा होगा।”व्यापारी ने तेनालीराम की बात मान ली। अगले दिन, उसने अपनी परछाई देखी और बाजार गया। दुर्भाग्यवश, उसकी दुकान में आग लग गई।जब व्यापारी दरबार आया, तेनालीराम ने कहा, “महाराज, यह साबित हो गया कि इस व्यक्ति का किसी की बदकिस्मती से कोई संबंध नहीं।

दरअसल, मनहूस तो व्यापारी खुद है क्योंकि उसने अंधविश्वास को बढ़ावा दिया।”राजा ने व्यापारी को डांटा और कहा, “किसी निर्दोष को दोष देने से पहले सच्चाई जाननी चाहिए।”इस तरह तेनालीराम ने अपनी चतुराई से एक निर्दोष को बचा लिया।