तेनालीराम और शिकारी झाड़ी की कहानी
तेनालीराम अपने चतुराई और समझदारी के लिए प्रसिद्ध थे। एक बार विजयनगर साम्राज्य में, राजा कृष्णदेव राय ने एक प्रतियोगिता की घोषणा की। राजा ने कहा, “जो भी मुझे सबसे बुद्धिमानी भरा उपाय बताएगा, उसे इनाम मिलेगा।”राजा के दरबार में सभी विद्वान अपनी-अपनी योजनाएँ लेकर आए, लेकिन कोई भी राजा को प्रभावित नहीं कर पाया।
अंत में तेनालीराम ने राजा से कहा, “महाराज, मुझे आपकी समस्या का समाधान मिल गया है। लेकिन मैं आपको इसे साबित करके दिखाऊंगा।”राजा ने सहमति दी, और तेनालीराम ने एक गहरी झाड़ी के पास जाकर वहाँ पर कुछ शिकारी छुपने का नाटक किया। उसने राजा से कहा, “महाराज, इस झाड़ी में शेर छुपा हुआ है। मैं इसे बाहर निकालूंगा।”राजा और अन्य दरबारी यह सुनकर हैरान हो गए। तेनालीराम ने झाड़ी के पास जाकर वहाँ से कुछ आवाज़ें निकालने लगा, जैसे शेर की दहाड़।
फिर उसने झाड़ी में आग लगाने का नाटक किया। कुछ ही समय बाद झाड़ी में से कुछ लोग दौड़ते हुए बाहर आए।दरअसल, वह शिकारी थे जो झाड़ी में छुपकर शिकार करने की योजना बना रहे थे। तेनालीराम ने उनकी चालाकी को उजागर कर दिया। राजा कृष्णदेव राय तेनालीराम की इस चतुराई से बहुत प्रभावित हुए और उन्हें इनाम दिया।
कहानी की शिक्षा:समस्या का समाधान बुद्धिमानी और चतुराई से किया जा सकता है।