तेनालीराम की कहानी: दूध न पीने वाली बिल्ली
तेनालीराम अपनी चतुराई और हास्य से भरी कहानियों के लिए प्रसिद्ध थे। यह कहानी उनके बुद्धिमानी का एक और उदाहरण है।कहानीएक बार राजा कृष्णदेव राय अपने दरबारियों के बीच तेनालीराम की बुद्धिमानी की परीक्षा लेना चाहते थे।
उन्होंने एक प्रतियोगिता की घोषणा की और कहा, “जो भी एक बिल्ली को ऐसा बना सके कि वह दूध न पीए, उसे इनाम मिलेगा।”सभी दरबारी परेशान हो गए, क्योंकि यह कार्य असंभव सा लगता था। बिल्ली को दूध न पीने के लिए मजबूर करना बहुत कठिन काम था। लेकिन तेनालीराम ने इसे चुनौती के रूप में लिया।
तेनालीराम ने एक छोटी सी बिल्ली ली और उसे अपने घर ले गया। उसने कई दिनों तक बिल्ली को सिर्फ गर्म दूध दिया। हर बार बिल्ली जैसे ही दूध पीने जाती, उसका मुँह जल जाता। धीरे-धीरे बिल्ली को दूध से डर लगने लगा।कुछ दिनों बाद, तेनालीराम उस बिल्ली को लेकर राजा के दरबार में पहुंचा।
जब बिल्ली के सामने दूध का कटोरा रखा गया, तो बिल्ली ने उसे सूंघा तक नहीं और दूर भाग गई।राजा कृष्णदेव राय हैरान रह गए और उन्होंने तेनालीराम से पूछा, “तुमने यह कैसे किया?”तेनालीराम ने हंसते हुए कहा, “महाराज, मैंने बिल्ली को यह सिखाया कि दूध पीने से उसका मुँह जल सकता है।
अब वह दूध को देखती है तो डर जाती है।”राजा तेनालीराम की चतुराई से बहुत प्रभावित हुए और उन्हें इनाम देकर सम्मानित किया।
शिक्षा:यह कहानी हमें सिखाती है कि बुद्धिमानी और सही दृष्टिकोण से कोई भी समस्या हल की जा सकती है।