तेनालीराम की कहानी: मनपसंद मिठाई / Tenaliram Story Manpasand Mithaai In Hindi

तेनालीराम की कहानी: मनपसंद मिठाई

एक बार की बात है, विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय ने अपने दरबार में एक प्रतियोगिता आयोजित की। राजा ने घोषणा की, “जो कोई मुझे अपनी मनपसंद मिठाई खिलाएगा, उसे मैं पुरस्कृत करूंगा।”

यह सुनकर सभी दरबारी सोच में पड़ गए कि राजा की मनपसंद मिठाई क्या हो सकती है। हर कोई राजा को खुश करने के लिए अलग-अलग मिठाइयाँ लाने लगा। किसी ने जलेबी लाकर दी, किसी ने लड्डू, किसी ने पेड़ा।

लेकिन राजा ने किसी मिठाई को देखकर प्रसन्नता नहीं जताई।तब तेनालीराम ने सोचा, “राजा की मनपसंद मिठाई वही होगी, जो उनकी सोच से जुड़ी हो।” उसने राजा की पसंद और उनकी आदतों को ध्यान में रखते हुए एक तरकीब निकाली।अगले दिन तेनालीराम एक खाली कटोरा लेकर राजा के दरबार में पहुंचा।

राजा ने पूछा, “तेनाली, यह क्या है? इसमें मिठाई कहां है?”तेनालीराम ने मुस्कुराते हुए कहा, “महाराज, आपकी मनपसंद मिठाई यही है।”राजा हैरान होकर बोले, “खाली कटोरा? यह कैसी मिठाई है?”तेनालीराम ने जवाब दिया, “महाराज, मेरी बात सुनिए।

जब कोई व्यक्ति बहुत भूखा होता है, तो सबसे पहले उसे रोटी सबसे मीठी लगती है। लेकिन जब आपकी भूख शांत हो जाती है, तो सबसे प्रिय मिठाई वह होती है जो आपको सोचने में आनंद दे। यह खाली कटोरा आपकी सोच और निर्णय लेने की शक्ति का प्रतीक है।”राजा तेनालीराम की बुद्धिमानी और सोच पर बहुत खुश हुए।

उन्होंने कहा, “तेनाली, तुमने मेरी मनपसंद मिठाई न लाकर भी मुझे खुश कर दिया। वास्तव में, तुम्हारी समझदारी ही मेरी सबसे बड़ी मिठाई है।”राजा ने तेनालीराम को पुरस्कृत किया और सभी दरबारियों ने उसकी प्रशंसा की।

सीख:सच्ची प्रसन्नता या मनपसंद चीज केवल भौतिक वस्तुओं से नहीं आती, बल्कि समझ और भावनाओं से जुड़ी होती है।