तेनालीराम और पड़ोसी राजा की कहानी
तेनालीराम अपनी बुद्धिमानी और चतुराई के लिए प्रसिद्ध थे। उनके किस्से न केवल विजय नगर में बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी मशहूर थे। एक बार, पड़ोसी राज्य के राजा ने तेनालीराम की चतुराई की परीक्षा लेने की सोची।
पड़ोसी राजा ने अपने दरबार में एक बड़ी सभा आयोजित की और विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय को निमंत्रण भेजा। राजा कृष्णदेव राय ने यह निमंत्रण स्वीकार किया और अपने साथ तेनालीराम को भी ले गए।
सभा में, पड़ोसी राजा ने तेनालीराम को देखकर कहा, “तेनालीराम, मैंने सुना है कि तुम बड़े बुद्धिमान हो। अगर तुमने मेरी एक चुनौती पूरी कर ली, तो मैं मान जाऊंगा कि तुम सचमुच चतुर हो।”तेनालीराम ने सम्मानपूर्वक सिर झुकाकर कहा, “राजन, कृपया अपनी चुनौती बताएं।”पड़ोसी राजा ने अपनी चुनौती बताते हुए कहा, “मैंने एक बड़ी सुराही में एक बहुत पतली गर्दन वाला अमूल्य मोती डाल दिया है।
तुम्हें इसे सुराही तोड़े बिना और पानी गिराए बिना बाहर निकालना होगा।”सभा में मौजूद सभी लोग इस चुनौती को सुनकर हैरान हो गए। यह एक असंभव काम लग रहा था। लेकिन तेनालीराम ने मुस्कुराते हुए कहा, “राजन, मैं आपकी चुनौती स्वीकार करता हूं।”तेनालीराम ने तुरंत एक कटोरी चीनी मंगवाई। उन्होंने धीरे-धीरे चीनी को सुराही में डालना शुरू कर दिया।
चीनी पानी में घुलने लगी, और पानी का घनत्व बढ़ने से मोती धीरे-धीरे ऊपर आ गया। कुछ ही समय में मोती सुराही की गर्दन तक पहुंच गया। तेनालीराम ने उसे आसानी से बाहर निकाल लिया।पड़ोसी राजा तेनालीराम की इस चतुराई को देखकर चकित रह गए। उन्होंने तेनालीराम की बुद्धिमानी की प्रशंसा की और उन्हें उपहार देकर सम्मानित किया।इस प्रकार, तेनालीराम ने अपनी चतुराई से न केवल पड़ोसी राजा को प्रभावित किया, बल्कि अपने राजा का मान भी बढ़ाया।
शिक्षा: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि धैर्य और समझदारी से हर समस्या का हल निकाला जा सकता है।