तेनालीराम की कहानी: सोने का आम
एक समय की बात है, विजयनगर साम्राज्य में राजा कृष्णदेव राय के दरबार में तेनालीराम अपनी बुद्धिमानी और चतुराई के लिए प्रसिद्ध थे। एक दिन, दरबार में एक व्यापारी आया और राजा को एक बहुत अनोखा उपहार देने की इच्छा व्यक्त की। वह एक सोने का आम लेकर आया था।
राजा और दरबार के सभी लोग सोने के आम को देखकर चकित हो गए। राजा ने व्यापारी से पूछा, “यह सोने का आम किसलिए लाए हो?”व्यापारी ने झुकते हुए कहा, “महाराज, यह आम मेरी ओर से आपके लिए एक भेंट है। मैं चाहता हूं कि आप इसे स्वीकार करें।”राजा ने खुशी से सोने का आम स्वीकार कर लिया और व्यापारी को इनाम देने का आदेश दिया। लेकिन तेनालीराम को व्यापारी की चालाकी का अंदेशा हुआ। वह चुपचाप सोचने लगा कि यह व्यापारी ऐसा उपहार क्यों दे रहा है।कुछ दिनों बाद, वही व्यापारी तेनालीराम के पास आया और उसे एक सोने का आम भेंट दिया।
तेनालीराम ने तुरंत उस आम को स्वीकार कर लिया और कहा, “मैं कल आपको इस उपहार का उत्तर दूंगा।”अगले दिन, तेनालीराम ने व्यापारी को राजा के दरबार में बुलाया। तेनालीराम ने दरबार में सबके सामने व्यापारी को बुलाकर कहा, “महाराज, यह व्यापारी आपको सोने का आम देकर कुछ स्वार्थी लाभ प्राप्त करना चाहता है। इसने मुझे भी ऐसा ही आम दिया और इसके पीछे छिपी सच्चाई को समझने के लिए मैंने इसे स्वीकार किया।”
फिर तेनालीराम ने अपनी योजना के अनुसार व्यापारी को सबके सामने कहा, “जैसे आपने सोने का आम दिया, वैसे ही हम आपको सोने की तलवार से पुरस्कार देना चाहते हैं।”व्यापारी घबरा गया और तुरंत अपने स्वार्थ की बात कबूल कर ली। उसने स्वीकार किया कि वह राजा के अनुग्रह से लाभ उठाने की कोशिश कर रहा था।
राजा ने व्यापारी को दंड दिया और तेनालीराम की चतुराई की तारीफ की। इस प्रकार तेनालीराम ने अपनी बुद्धिमानी से राजा को एक धोखेबाज से बचा लिया।
शिक्षा:इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें किसी के उपहार या प्रशंसा के पीछे छिपे स्वार्थ को समझना चाहिए और बुद्धिमानी से निर्णय लेना चाहिए।