भूखा राजा और गरीब किसान की कहानी | The Hungry King And Poor Farmer Story In Hindi

भूखा राजा और गरीब किसान

बहुत समय पहले की बात है, एक राजा अपने शिकार पर निकला। जंगल में घूमते-घूमते वह रास्ता भटक गया और बहुत थक गया। कई घंटे बीत गए, और अब उसे तेज भूख भी लगने लगी।कुछ दूर चलने पर उसे एक छोटी-सी झोपड़ी दिखाई दी। वह झोपड़ी एक गरीब किसान की थी। राजा ने दरवाजा खटखटाया।

किसान ने दरवाजा खोला और एक थके-हारे व्यक्ति को देख कर कहा, “आइए, अंदर आइए। आप बहुत थके हुए लग रहे हैं।”राजा अंदर गया और किसान से बोला, “मुझे बहुत भूख लगी है, क्या कुछ खाने को मिलेगा?”गरीब किसान के पास देने के लिए ज्यादा कुछ नहीं था, लेकिन उसने राजा को बिना पहचाने हुए प्रेमपूर्वक बासी रोटी और सरसों का साग परोसा।

राजा को बहुत भूख लगी थी, इसलिए उसने बिना किसी शिकायत के भोजन खा लिया।खाने के बाद राजा ने किसान से कहा, “तुमने मेरी भूख मिटाई, मैं तुम्हारा बहुत आभारी हूँ। मैं तुम्हें इनाम देना चाहता हूँ। मैं असल में इस राज्य का राजा हूँ!”किसान यह सुनकर चौंक गया और झुककर बोला, “महाराज, आपकी सेवा करना ही मेरा सौभाग्य है।

मुझे किसी इनाम की आवश्यकता नहीं है।”राजा किसान की ईमानदारी और उदारता से बहुत प्रभावित हुआ। उसने कहा, “मैं तुम्हारी सादगी और दयालुता से बहुत प्रभावित हूँ। मैं तुम्हें अपनी राजधानी आने का निमंत्रण देता हूँ। वहाँ तुम्हारे लिए इनाम तैयार रहेगा।”लेकिन किसान ने विनम्रता से उत्तर दिया, “महाराज, मुझे धन-दौलत की कोई चाह नहीं।

मेरे लिए यही खुशी की बात है कि मैं अपनी मेहनत की कमाई से जीवनयापन करता हूँ।”राजा किसान की संतोषी प्रवृत्ति से बहुत प्रभावित हुआ और मन ही मन निश्चय किया कि वह भी प्रजा की भलाई के लिए और अधिक प्रयास करेगा।

शिक्षा:इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सच्ची खुशी धन-दौलत में नहीं, बल्कि संतोष और परोपकार में होती है।