बुद्धिमान राजा की कहानी
बहुत समय पहले की बात है, एक राज्य में एक न्यायप्रिय और बुद्धिमान राजा शासन करता था। वह हमेशा अपने प्रजा की भलाई के बारे में सोचता था और अपने निर्णयों से सबका दिल जीत लेता था।
राजा की परीक्षाएक दिन, राजा ने अपने राज्य में यह देखने का निर्णय लिया कि उसकी प्रजा कितनी ईमानदार और परिश्रमी है। उसने राजमार्ग के बीच में एक बड़ी चट्टान रखवा दी और पास में छिपकर यह देखने लगा कि लोग क्या करते हैं।
कई व्यापारी और अमीर लोग वहां से गुजरे, लेकिन किसी ने भी चट्टान हटाने की कोशिश नहीं की। वे बस शिकायत करते रहे कि राजा को सड़क की मरम्मत करवानी चाहिए। कुछ लोग चट्टान को देखकर रास्ता बदलकर चले गए।फिर, एक गरीब किसान वहां से गुजरा।
उसने देखा कि चट्टान रास्ता रोक रही है, तो उसने खुद ही उसे हटाने का निश्चय किया। उसने पूरी ताकत लगाकर धीरे-धीरे चट्टान को किनारे कर दिया।
छिपा खजाना
जब किसान ने चट्टान हटाई, तो उसने देखा कि उसके नीचे एक थैली रखी थी। जब उसने उसे खोला, तो वह हैरान रह गया! उसमें सोने के सिक्के और राजा का एक पत्र था।
पत्र में लिखा था:
“यह इनाम उस व्यक्ति के लिए है जो दूसरों की भलाई के लिए मेहनत करता है। तुमने अपनी ईमानदारी और परिश्रम से यह पुरस्कार अर्जित किया है।”
कहानी से शिक्षाइस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि समस्याओं से भागने के बजाय उनका हल निकालना चाहिए। जो लोग परिश्रम और ईमानदारी से काम करते हैं, उन्हें हमेशा सफलता और पुरस्कार मिलता है।
“कठिनाइयों के पीछे ही अवसर छिपे होते हैं।”