बन्दर मामा कविता
बन्दर मामा बड़े नटखट
बन्दर मामा बड़े नटखट,
कूद-फांद में हैं सबसे पट।
पेड़-पेड़ पर छलांग लगाते,
मस्ती में अपना दिन बिताते।
लाल टोपी और लम्बी दुम
लाल टोपी और लम्बी दुम,
बन्दर मामा का बढ़ा है दम।
चोरी-छुपे खाना ले जाते,
हर बार सबको चकमा दे जाते।
खेल-खेल में करते शरारत
बच्चों के संग खेल जमाते,
कभी छुपते, कभी दिख जाते।
खेल-खेल में सबको हंसाते,
मस्ती से सबका दिल बहलाते।
बन्दर मामा का पाठ
हंसी-खुशी से जीना सिखाते,
मुश्किलों में भी मुस्कुराते।
शरारत के साथ मिल-जुलकर रहना,
बन्दर मामा का यही कहना।
निष्कर्ष
बन्दर मामा की प्यारी कहानी,
हर दिल में बसती है निशानी।
उनकी मस्ती हमें याद दिलाती,
जीवन को खुशी से जीना सिखाती।