बंदर
जंगल का राजा, मस्त-मलंग,
पेड़ों पर करता है उछल-कूद संग।
दुम हिलाता, छलांग लगाता,
हर बच्चे को खूब हंसाता।
गुड़-चुड़ाकर खाता है आम,
पलक झपकते चुरा लेता नाम।
हरकतों से अपनी मचाए धमाल,
बंदर है जंगल का सबसे बड़ा कमाल।
शाख से शाखा फुर्ती से जाए,
कभी तो केला चुपके चबाए।
सिर खुजलाए, आंखें मटकाए,
दिखावे अपनी नटखट चालाकी के नायाब साए।
चिढ़ाने में तो माहिर खिलाड़ी,
बच्चों संग करे मस्ती भारी।
हमें सिखाता जोश से जीना,
बंदर है हंसी का खजाना महीना।
आओ बंदर को प्यार जताएं,
उसके जंगल को हरा बनाएं।
उसके घर का सम्मान बढ़ाएं,
प्रकृति संग ये रिश्ता निभाएं।