नटखट हम, हां नटखट हम
नटखट हम, हां नटखट हम,
मस्ती की गागर भरते हम।
जहां जाएं, रंग जमाएं,
हंसते-हंसते सबको हंसाएं।
दीवारों पर चित्र बनाते,
कागज की नावें तैराते।
बारिश में जब गाते गाना,
सब कहते, “बस करो दीवाना!”
गुब्बारे फोड़ें, पतंग उड़ाएं,
तितलियों के पीछे भाग जाएं।
कभी मां की आंखों में नमी लाएं,
तो कभी पापा से जिद लड़ाएं।
खेल-खिलौनों की है अपनी दुनिया,
जहां हर चीज लगती है चुनिया।
बगीचे में दौड़ते, फूलों से खेलते,
तितलियों के संग, सपने बुनते।
नटखट हम, पर सच्चे दिल के,
हर गम हर लें, हर इक पल के।
हंसी-ठिठोली से भर दें जीवन,
बचपन के साथी, सबके प्रिय जन।
तो आओ संग में मस्ती करें,
नटखट बन, हर पल हस्ती करें।
दुनिया की चिंता छोड़ चलो,
जिंदगी को बस जियो, नटखट बनो।